A school love story in Hindi , मैं और वो वक्त ।।।

A school love story in hindi ,and  School days Romance:-

                                                    हर एक आदमी जो स्कूल में पढ़ा है ,वो कभी भी स्कूल दिनों को भूल नहीं सकता, चाहे वो कितना भी बड़ा पैसे वाला बन जाये या गरीब हो। हर एक आदमी अपनी अपनी स्कूल की लव स्टोरी  को सबसे बेहतर मानता  हैं , और कहता है की काश वो दिन वापस आ जाये ।

                  तो हम आपके वो दिन तो नहीं लौटा सकते पर इतना कर सकते है की आपको आपकी स्कूल लाइफ को याद जरूर करा सकते है । मैंने ऐसी ही true love story का अपने शब्दों में व्यान करने की कोशिश की है ।अगर  कोई गलती हो जाये और आपको ठेस पहुंचे तो हमे क्षमा करे ।


मैं और वो वक्त:-

भाग 1

आज शनिवार है ,मेरा तो बिलकुल मन ही नहीं था, कि आज मैं कोचिंग जाऊं ,पर एक चहरा था जो मुझे बार बार जाने के लिए मेरे दिल को मजबूर कर रहा था। आखिर वही हुआ जिसका मुझे डर था , मुझे आज पढने का तो मन बिलकुल नहीं था पर फिर भी मैं आ गया जिसका कारण वो थी ।।

              हाँ आपने सही सोचा , आज मैं सिर्फ एक लडकी को देखने मात्र के लिए ही कोचिंग गया था । वो लडकी जिसका नाम तक मुझे नहीं पता था । वैसे तो मेरे सारे दोस्त बोलते थे कि वो एक बडे बाप की बेटी है , लेकिन वो दिखने में एक साधारण सी लडकी थी , लेकिन जब वो मुस्कराती तो मानो हम सभी दोस्तों को ऐसा सुकून मिलता जैसे कडकती धूप में किसी ने शरबत पिला दिया हो । उसकी आखें इतनी सुन्दर थी की मुझे तो लगता था कि मृगनयनों की तुलना उससे की जानी चाहिए। वो इतनी  खूबसूरत थी कि हमारी कक्षा के लगभग दो सौ लडकों में से शायद ही कोई होगा जिसके लिए वो ड्रीमगर्ल ना रही हो । यही कारण ही तो था जिसके कारण लडकों कोचिंग टाइम से आधा आधा घण्टे पहले आके आगे की सीट रिजर्व कर लेते थे । मैं उनमें से तो नहीं था की जल्दि पहुच जाऊं ,लेकिन मेरा एक दोस्त था जो सबसे पहले आके दो सीटों पर अपनी काफियां बिछा देता था।  और उसका कारण था कि मैं उससे कहता था कि वो सिर्फ तुझसे प्यार करती है , और ये रोज सुनने के लिए वो मेरे लिए सीट रोकता था। 



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              लेकिन आज जाने क्या हुआ कि वो कोचिंग आयी ही नहीं । जिसके कारण जो लडके उसके लिए आगे की दो लाइन में बैढते थे वो सब की सब पीछे मायुस से बैठे हुऐ थे। और अब में भी यही सोच रहा था कि आज जाने किसका चहरा देखा था। लेकिन फिर भी रोजना की तरह मेरे उस दोस्त ने जो जगह रोकी थीऔर  मैं उसी पर जाके बैठ गया । 
          जब टीचर ने सबके ऊतरे हुऐ चहरे देखे तो उन्हें लगा शायद बच्चे आज उनके द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों से डर गये हैं । तो उन्होंने हम पर दया दिखाई और बोले कि बच्चो आज हम नया टोपिक स्टार्ट करने वाले हैं। और उन्होंने पढाना शुरू कर दिया । पर शायद कुछ ही लडके होंगे जिनका मन आज पढाई में लगा हो । 
                        जब हम लोग अपने अपने घर जा रहे थे तो सब की सब लडके ये सोच रहे थे की आज वो आयी क्यों नहीं । और इस लड़कों  कि फुसफुस में आज मुझे उसका नाम पता चला । उसका नाम अनु था । लेकिन ये उसका शायद शोर्ट नाम था । अब कल की छुट्टी थी तो मुझे बहुत दुख हुआ क्योंकि अब उसे दो दिन बाद देखना होगा । 



        सोमवार आज मैं इतना उतावला था कि मेरा दिमाक उसकी हर अदा उसकी हर एक ईमेज जो मेरे दिमाक में थी सब की सब बहुत स्पीड से घूम रही थी । और इसीलिए आज में सबसे पहले कोचिंग लगभग चालीस मिनट पहले ही जा पहंुचा। वैसे तो वहां पहले से ही दस बारह लडके बैठे हुए थे पर मैं इतना जल्दि आज पहली बार आया था। जिसके कारण सर ने मुझसे मेरा नाम पूछा और मुझसे पढाई के बारे में और अपनी विषय के बारे के बारे में प्रश्न पूछते रहे क्योंकि ये रसायन विज्ञान ही तो थी जो मुझे सबसे आसान लगती थी । सही जवाब देने के कारण सर को मालूम हो गया की में एक पढने वाला बन्दा हूँ । 




           अब कक्षा भरने लग गयी अब चार बज चुके थे । लेकिन आज भी अनु अभी तक नहीं आयी । लेकिन आज एक चार लडकियों का एक ग्रुप ने एडमिशन लिया और वो चारों की चारों सच में एनु से सून्दर थी । जिसके कारण आज सारे लडके अनु को भूल कर बस उनकी बातें करने लग गये । और कक्षा एक लडकों के ग्रुप ने उन चारों को बांट लिया और फुसफुसाने लग गये कि वो पीले सूट वाली मेरी है काले सूट वाली तेरी और जिसके वाल लम्बे हैं वो इस माटे की है। लेकिन मेरे दिमाक में सिर्फ अनु ही घूम रही थी और मैं सोच रहा था शायद वो बिमार हो गयी होगी इसलिए नहीं आयी । 


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           ऐसे ही एक सप्ताह बीत गया लेकिन अनु आयी ही नहीं । लेकिन मुझे तो शायद उससे प्यार सा हो गया हो , वो मेरे दिमाक से जा ही नहीं रही थी । और अब तो मेरे वो दोस्त जो मेरे लिए सीट रिजर्व रखता था वो भी किसी कविता को मेरी भाबी कहने लग गया जो उन चार लडकियों में ही थी जो कुछ दिन पहले ही आयी थी । समय निकलता गया एक सप्ताह निकल गया और दूसरा भी निकलने वाला ही था। 


ये कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है, इसमें लिए गये नाम काल्पनिक हैं । हम किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाना का कोई  मक़सद  नहीं चाहते ।
ये कहानी आगे चलती रहगी ,आप सभी हमें comment  मे जरूर बतायें आपको मेरी कहानी कैसी लगी ।
 धन्यवाद।ं।।ं



भाग -2 प्रकाशित हो चूका हैं कृपया यहां क्लिक करे 
                                                                                                                 
                            Part-2






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